13 जुलाई 2019 - 12:15
33 दिवसीय युद्ध में सैयद हसन नसरुल्लाह को इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता का विशेष संदेश क्या था? कैसे इस संदेश ने इस्राईल को धूल

इराक़ के नुजबा आंदोलन के महासचिव शैख़ अकरम काबी ने 33 दिवसीय युद्ध की वर्षगांठ पर लेबनान के हिज़बुल्लाह संगठन के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह से अपनी मुलाक़ात का एक रोचक पहलू बयान किया है।

ज़ायोनी शासन के साथ लेबनान के हिज़बुल्लाह संगठन के 33 दिवसीय युद्ध की 13वीं वर्षगांठ पर शैख़ अकरम काबी ने पहली बार इस घटना का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि इस युद्ध के बाद उन्होंने सैयद हसन नसरुल्लाह से मुलाक़ात की थी जिसमें उन्होंने इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के एक अहम आदेश का उल्लेख किया था। इराक़ के नुजबा आंदोलन के प्रमुख ने बताया कि जुलाई में शुरू हुए 33 दिवसीय युद्ध में दोनों पक्षों की संभावनाओं की कोई तुलना ही नहीं की जा सकती थी और हिज़बुल्लाह के संघर्षकर्ताओं की पोज़ीशन अच्छी नहीं थी क्योंकि अधिकतर देश इस्राईल का समर्थन कर रहे थे।

 

शैख़ अकरम काबी ने बताया कि ज़ायोनी दुश्मन के पास आधुनिक लड़ाकू विमान थे और उसे अमरीका, यूरोप और अरब देशों का समर्थन हासिल था जबकि हिज़बुल्लाह के बहुत से संघर्षकर्ता पहाड़ों और दर्रों में फंसे हुए थे और उन्हें घेर लिया गया था। यही कारण था कि पूरी दुनिया में हिज़बुल्लाह के समर्थक बहुत अधिक चिंतित थे। उसी दौरान सैयद हसन नसरुल्लाह ने अभूतपूर्व संतोष के साथ संचार माध्यमों में प्रतिरोध के मोर्चे की निश्चित विजय की शुभ सूचना दे कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।

 

इराक़ के नुजबा आंदोलन के महासचिव शैख़ अकरम काबी ने बताया कि युद्ध की समाप्ति के कुछ समय बाद वे कई इराक़ी संघर्षकर्ताओं के साथ लेबनान गए ताकि सैयद हसन नसरुल्लाह से मुलाक़ात करके उन्हें इस बड़ी विजय की बधाई दें। वे कहते हैं कि रास्ते में एक सवाल निरंतर मेरे मन में गूंज रहा था और मैंने फ़ैसला किया कि सैयद हसन नसरुल्लाह से मुलाक़ात होते ही मैं उनसे पूछूंगा कि उन्होंने किस आधार पर विजय की शुभ सूचना दी थी? उन्हें इतना विश्वास कहां से मिला था और वे किस प्रकार इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे।शैख़ काबी कहते हैं कि मैंने लेबनान में हिज़बुल्लाह के महासचिव से मुलाक़ात होते ही उनसे यह सवाल पूछा। उन्होंने उत्तर में कहा कि जब हिज़बुल्लाह के जियालों का घेरा कड़ा हो गया था उसी समय मुझे इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई का एक विशेष संदेश मिला जिसमें उन्होंने बल देकर कहा था कि सभी संघर्षकर्ताओं से कहा जाए कि वे दुआए "जौशन सग़ीर" पढ़ें। उन्होंने अपने संदेश में शुभ सूचना दी थी कि अंतिम विजय निश्चित रूप से प्रतिरोध की होगी। इसके बाद सैयद हसन नसरुल्लाह ने शैख़ अकरम काबी से कहा कि अनुभव से मेरे लिए यह बात सिद्ध हो चुकी है कि आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई जब भी कोई वादा करते हैं वह अवश्य ही पूरा होता है इसी लिए मैंने उनकी शुभ सूचना के आधार पर संचार माध्यमों में पूरे विश्वास से अंतिम विजय की बात की और प्रतिरोध के समर्थकों को विजय की शूभ सूचना दी।